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jai
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⁣राजा परीक्षित के जीवन का अंतिम दिन…
मृत्यु सामने थी, फिर भी मन भय और शोक से भरा हुआ था।
तभी महर्षि शुकदेव ने उन्हें एक ऐसी कथा सुनाई
जिसने मृत्यु के भय को ही समाप्त कर दिया।

यह कथा बताती है कि
👉 यह शरीर क्या है?
👉 आत्मा क्यों भयभीत होती है?
👉 और मृत्यु वास्तव में क्या है?

“मल-मूत्र की कोठरी”
एक प्रतीकात्मक लेकिन अत्यंत गूढ़ आध्यात्मिक कथा है,
जो हमें देह के मोह से मुक्त होकर
सत्य और निर्वाण की ओर ले जाती है।

इस वीडियो को अंत तक अवश्य देखें
और अपने भीतर एक प्रश्न पूछें —
क्या मैं भी इसी झोपड़ी से चिपका हुआ हूँ?