Abhishek Kumar
Abhishek Kumar

Abhishek Kumar

      |      

Iscritti

   Ultimi video

Abhishek Kumar
10 Visualizzazioni · 2 mesi fa

dance video 📷📷

Abhishek Kumar
7 Visualizzazioni · 2 mesi fa

viral video

Abhishek Kumar
4 Visualizzazioni · 2 mesi fa

Pawan singh

Abhishek Kumar
6 Visualizzazioni · 2 mesi fa

abhishek singh

Abhishek Kumar
2 Visualizzazioni · 2 mesi fa

dhamaka song Pawan Singh

Abhishek Kumar
1 Visualizzazioni · 2 mesi fa

bhojpuri song

Abhishek Kumar
4 Visualizzazioni · 2 mesi fa

hamme tumse hua hai pyar hum kya kare

Abhishek Kumar
1 Visualizzazioni · 2 mesi fa

single boy

Abhishek Kumar
6 Visualizzazioni · 3 mesi fa

comedy video

Abhishek Kumar
4 Visualizzazioni · 3 mesi fa

aanshi bharti

Abhishek Kumar
1 Visualizzazioni · 3 mesi fa

ठंड में गरीब परिवार की कहानी

शहर के किनारे बसी झुग्गियों की उस बस्ती में सर्दी हर साल कुछ ज़्यादा ही बेरहम होकर आती थी। टीन की छतें, प्लास्टिक की चादरें और टूटी ईंटों से बने छोटे-छोटे घर ठंडी हवाओं के सामने बेबस थे। इसी बस्ती में रहता था रामू का परिवार—रामू, उसकी पत्नी सीता, बूढ़ी माँ और दो छोटे बच्चे, गुड़िया और मोहन।

पौष का महीना शुरू होते ही ठंड ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। सुबह-सुबह धुंध इतनी घनी होती कि सामने का रास्ता भी दिखाई नहीं देता। रात को बर्फ जैसी ठंडी हवा शरीर के आर-पार हो जाती। रामू के पास कोई पक्का काम नहीं था। कभी दिहाड़ी मज़दूरी मिल जाती, तो कभी पूरा दिन खाली हाथ लौटना पड़ता। ठंड के दिनों में काम और भी कम हो जाता, क्योंकि लोग खुद घर से बाहर निकलना नहीं चाहते थे।

उस सुबह रामू जल्दी उठ गया। उसने अपनी पुरानी, फटी हुई शॉल कंधों पर डाली और बाहर निकल पड़ा। सीता ने चूल्हे पर रखी थोड़ी-सी चाय उसे पकड़ाते हुए कहा,
“आज ज़्यादा देर मत करना। बच्चों की तबियत ठीक नहीं लग रही।”
रामू ने सिर हिलाया, लेकिन उसकी आँखों में चिंता साफ़ दिख रही थी। उसे पता था कि अगर आज काम नहीं मिला, तो शाम का खाना भी मुश्किल हो जाएगा।

घर के अंदर हालात और भी कठिन थे। सीता बच्चों को एक ही फटी हुई रज़ाई में लपेटे बैठी थी। गुड़िया की नाक बह रही थी और मोहन लगातार खाँस रहा था। बूढ़ी माँ को गठिया की तकलीफ़ थी, ठंड में उनके हाथ-पाँव अकड़ जाते थे। दवा के नाम पर बस घरेलू नुस्खे ही थे—गर्म पानी और थोड़ी सी राख से सेंक।

दोपहर तक रामू को कोई काम नहीं मिला। ठंड से हाथ सुन्न हो चुके थे। तभी एक अमीर मोहल्ले में उसे ईंटें ढोने का काम मिल गया। मज़दूरी कम थी, लेकिन उसने बिना सोचे हामी भर दी। शाम तक उसकी कमर टूट चुकी थी, पर हाथ में कुछ पैसे थे। रास्ते में उसने सोचा कि बच्चों के लिए थोड़ा दूध और माँ के लिए तेल ले लेगा।

उधर घर में सीता दिन भर बच्चों को संभालती रही। पड़ोस की शांति काकी आईं और उन्होंने अपने पुराने स्वेटर दे दिए।
“मेरे बच्चों के छोटे हो गए हैं, इनके काम आ जाएंगे,” उन्होंने कहा।
सीता की आँखों में आँसू आ गए। उसने धन्यवाद कहा और बच्चों को स्वेटर पहना दिए। पहली बार उस दिन बच्चों के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आई।

शाम को जब रामू घर लौटा, तो उसके हाथ में एक थैली थी। उसमें थोड़ा आटा, कुछ सब्ज़ियाँ और दूध का छोटा पैकेट था।
“आज काम मिल गया,” उसने थकी हुई आवाज़ में कहा।
सीता ने जल्दी से चूल्हा जलाया। झुग्गी में पहली बार उस दिन गर्म खाने की खुशबू फैली।

रात गहरी होती गई और ठंड और तेज़ हो गई। पूरा परिवार एक साथ बैठकर आग तापने लगा। रामू ने बाहर से कुछ लकड़ियाँ और पुराने अख़बार इकट्ठे कर लिए थे। आग की हल्की आँच ने सबको थोड़ी राहत दी। बूढ़ी माँ ने बच्चों को अपनी पुरानी कहानियाँ सुनानी शुरू कीं—गाँव की, खेतों की और पुराने ज़माने की।

उसी रात अचानक मोहन की तबियत बिगड़ गई। उसका शरीर तपने लगा। सीता घबरा गई।
“इसे डॉक्टर के पास ले चलना होगा,” उसने कहा।
रामू के पास पैसे बहुत कम थे, लेकिन बेटे की हालत देखकर उसने देर नहीं की। वह उसे गोद में उठाकर नज़दीकी सरकारी अस्पताल ले गया। ठंड में खाली सड़कों पर चलते हुए उसे लगा मानो हर सांस बोझ बन गई हो।

अस्पताल में डॉक्टर ने दवा दी और कहा कि समय पर ले आए, वरना हालत बिगड़ सकती थी। रामू ने राहत की सांस ली। लौटते समय उसके मन में एक अजीब-सा भरोसा था—कि शायद हालात हमेशा ऐसे नहीं रहेंगे।

अगली सुबह सूरज निकला तो ठंड थोड़ी कम थी। बस्ती में खबर फैल गई कि पास के स्कूल में गरीबों को कंबल बांटे जा रहे हैं। रामू और सीता बच्चों को लेकर वहाँ पहुँचे। हर परिवार को एक-एक कंबल मिला। वह कंबल उनके लिए किसी खज़ाने से कम नहीं था।

उस रात पूरा परिवार नए कंबल में लिपटकर सोया। बाहर ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन अंदर उम्मीद की थोड़ी-सी गर्माहट थी। रामू ने मन ही मन सोचा—गरीबी और ठंड भले ही सख्त हों, लेकिन इंसान की हिम्मत और दूसरों की मदद उन्हें हर बार थोड़ा कमज़ोर कर देती है।

Abhishek Kumar
3 Visualizzazioni · 3 mesi fa

bhojpuri song Pawan Singh

Abhishek Kumar
6 Visualizzazioni · 3 mesi fa

es monkey ka kya hoga

Abhishek Kumar
3 Visualizzazioni · 3 mesi fa

video

Abhishek Kumar
11 Visualizzazioni · 3 mesi fa

comedy video

Abhishek Kumar
3 Visualizzazioni · 3 mesi fa

#trending

Mostra di più