كليبو
बारिश की एक शाम थी, जब आरव पहली बार मीरा से मिला। बस स्टॉप पर खड़ी मीरा की आँखों में एक अजीब-सी उदासी थी। आरव ने छाता आगे बढ़ाया, और वहीं से एक अनकहा रिश्ता शुरू हो गया।
धीरे-धीरे दोनों की बातें बढ़ीं—कभी चाय की दुकानों पर, कभी लंबी कॉल्स में। आरव के सपनों में मीरा थी, और मीरा की दुआओं में आरव।
रोज़ मेरी गली से गुजरती थी,
मैं रोज़ उसकी एक झलक में मरती थी।
लफ़्ज़ दिल में थे, होंठों तक आए नहीं,
बस आँखों ने वो कहानी कही जो कभी सुनाई
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