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चूहे ने शेर को देखा और उसके ऊपर चढ़ गया। शेर को नींद में खुजली हुई और उसने अपना पंजा उठाकर चूहे को मारने की कोशिश की, लेकिन चूहे ने कहा, "मेरे प्रभु, मुझे माफ करें, मैं आपका क्या बिगाड़ सकता हूँ? मैं तो एक छोटा सा चूहा हूँ।"

शेर ने चूहे की बात मान ली और उसे छोड़ दिया। चूहे ने शेर से कहा, "धन्यवाद, मेरे प्रभु। मैं आपका यह उपकार कभी नहीं भूलूंगा।" शेर ने कहा, "तुम एक छोटे से चूहे हो, तुम मेरी क्या मदद कर सकते हो?"

कुछ दिनों बाद, शेर एक जाल में फंस गया। वह जितना ज्यादा जाल से निकलने की कोशिश करता, उतना ही ज्यादा जाल में फंसता जाता। शेर ने जोर से गर्जना की, लेकिन कोई उसकी मदद के लिए नहीं आया। तभी चूहे ने शेर की आवाज सुनी और वह उसकी मदद के लिए आया। चूहे ने जाल को काट दिया और शेर को बचा लिया।

शेर ने चूहे से कहा, "मैं तुम्हारा यह उपकार कभी नहीं भूलूंगा। तुमने मेरी जान बचाई है, मैं तुम्हारा ऋणी हूँ।" चूहे ने कहा, "मेरे प्रभु, आपने मुझे पहले ही माफ कर दिया था, अब मैं आपका ऋण चुका दिया है। हम दोनों दोस्त हैं, अब से हम साथ रहेंगे।"

शेर और चूहे की दोस्ती हो गई और वे दोनों साथ में रहने लगे। वे दोनों एक दूसरे की मदद करते और साथ में खेलते। शेर ने चूहे से कहा, "तुम एक छोटे से चूहे हो, लेकिन तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है।" चूहे ने कहा, "मेरे प्रभु, आप एक शक्तिशाली शेर हो, लेकिन आपका दिल बहुत नरम है।"

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7 Views · 2 months ago

तो फिर एक और कहानी सुनाते हैं! 🐒

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