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प्रातःकाल की पावन बेला में राधारानी जी के दर्शन करते ही मन भक्तिरस से भर जाता है। मंदिर में घंटियों की मधुर ध्वनि और धूप-दीप की सुगंध वातावरण को दिव्य बना देती है। श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों से सजी राधारानी जी की अलौकिक छवि मन को शांति प्रदान करती है। आरती के समय जब “जय राधे-राधे” का उच्चारण होता है, तो हृदय आनंद से झूम उठता है। भक्त श्रद्धा से हाथ जोड़कर आशीर्वाद की कामना करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो राधारानी जी अपनी करुणा से सभी कष्ट हर लेती हैं और जीवन को प्रेम व भक्ति से भर देती हैं।
प्रातःकाल जब वृंदावन की पावन धरा पर सूर्य की पहली किरण पड़ती है, तब श्रीराधारानी जी के शुभ दर्शन होते हैं। मंदिर में घंटियों की मधुर ध्वनि गूंज उठती है और भक्त श्रद्धा से भरकर सुबह की आरती करते हैं। राधारानी जी का मुखमंडल करुणा, प्रेम और शांति से आलोकित दिखाई देता है। फूलों की सुगंध, दीपक की ज्योति और भजनों की मधुरता वातावरण को दिव्य बना देती है। आरती के समय भक्त मन, वचन और कर्म से उन्हें प्रणाम करते हैं। राधारानी जी के दर्शन से हृदय आनंद, भक्ति और प्रेम से भर जाता है।
राधा रानी जी के सुबह के दर्शन अत्यंत अलौकिक और मन को शांति देने वाले होते हैं। प्रातःकाल मंदिर में जब मंगल आरती होती है, तब वातावरण भक्तिमय हो जाता है। शंख, घंटा और मृदंग की मधुर ध्वनि से पूरा मंदिर गूंज उठता है। राधा रानी के श्रीविग्रह को सुंदर वस्त्रों, फूलों और आभूषणों से सजाया जाता है। आरती के समय दीपों की ज्योति से उनका मुखमंडल और भी दिव्य प्रतीत होता है। भक्त श्रद्धा और प्रेम से हाथ जोड़कर दर्शन करते हैं। ऐसा लगता है मानो राधा रानी अपनी कृपा दृष्टि से सबके कष्ट हर लेती हैं।
प्रातःकाल व्रजधाम में श्रीराधारानी जी की मधुर सुबह आरती होती है। जैसे ही मंदिर के कपाट खुलते हैं, शंखनाद और घंटियों की दिव्य ध्वनि वातावरण को पावन कर देती है। भक्त प्रेमपूर्वक “जय श्रीराधे” का उच्चारण करते हुए आरती में सम्मिलित होते हैं। राधारानी जी के मुखमंडल पर कोमल मुस्कान और नेत्रों में करुणा की छटा झलकती है। फूलों और सुगंधित धूप से सजा हुआ मंदिर भक्तों के मन को शांति और आनंद से भर देता है। इस पावन दर्शन से हृदय में भक्ति, प्रेम और सच्ची आस्था का संचार होता है।
