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— Team ApnaTube

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Sandhya

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पम्बन ब्रिज भारत के सबसे अद्भुत और ऐतिहासिक पुलों में से एक है, जो तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप को मुख्य भूमि से जोड़ता है। यह पुल बंगाल की खाड़ी और मन्नार की खाड़ी के बीच फैला हुआ है, जहाँ से गुजरती ट्रेन और चारों ओर फैला नीला समुद्र एक अविस्मरणीय नज़ारा पेश करता है।
1914 में बना पम्बन ब्रिज भारत का पहला समुद्री रेलवे पुल था। इसकी खासियत यह है कि इसका मध्य भाग खुलने वाला (Vertical Lift Span) है, जिससे बड़े जहाज़ आसानी से निकल सकते हैं। समुद्र के ऊपर चलती ट्रेन, तेज़ हवाएँ और नीचे लहरों की आवाज़ इस जगह को बेहद रोमांचक बनाती हैं।
पम्बन ब्रिज न सिर्फ इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना है, बल्कि यह धार्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यही रास्ता पवित्र रामेश्वरम धाम तक जाता है। सूर्यास्त और सूर्योदय के समय यहाँ का दृश्य और भी मनमोहक हो जाता है, जो फोटोग्राफी और व्लॉगिंग के लिए परफेक्ट है।
अगर आप प्रकृति, इतिहास और रोमांच तीनों का अनुभव एक साथ करना चाहते हैं, तो पम्बन ब्रिज आपकी यात्रा सूची में ज़रूर होना चाहिए। 🌊🚆

Ashok

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Alawdeen Alawdeen

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इतिहास के पन्नों में राजपूतों का शौर्य, साहस और बलिदान वास्तव में अतुलनीय रहा है। जब हम "राजपूतों की तरह लड़ने" की बात करते हैं, तो उसका अर्थ केवल युद्ध नहीं, बल्कि एक खास जीवन दर्शन और नैतिक संहिता (Ethos) से होता है।
यहाँ कुछ ऐसे गुण दिए गए हैं जो राजपूत योद्धाओं की पहचान रहे हैं:
1. शरणागत की रक्षा (प्रण पालन)
राजपूतों के लिए 'शरण में आए हुए' की रक्षा करना अपने प्राणों से भी बढ़कर था। "प्राण जाए पर वचन न जाई" उनके जीवन का मूल मंत्र था। चाहे वह हम्मीर देव चौहान का शरणागत के लिए अलाउद्दीन खिलजी से लोहा लेना हो या अन्य उदाहरण, उन्होंने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
2. वीरता और आत्मसम्मान (केसरिया और जौहर)
जब जीत असंभव लगती थी, तब राजपूत योद्धा 'केसरिया' (अंतिम युद्ध के लिए निकलना) करते थे और वीरांगनाएं 'जौहर' करती थीं। यह हार स्वीकार न करने और अपनी गरिमा को सर्वोच्च रखने का एक ऐसा प्रमाण था जिसका उदाहरण विश्व इतिहास में दुर्लभ है।
3. युद्ध कौशल और मर्यादा
राजपूत युद्ध के मैदान में भी नीति और मर्यादा का पालन करते थे। निहत्थे पर वार न करना और पीठ न दिखाना उनकी वीरता का हिस्सा था। महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और राणा सांगा जैसे योद्धाओं की वीरता की कहानियाँ आज भी प्रेरणा देती हैं।
"सिंहों की दहाड़ और तलवारों की खनक, इतिहास गवाह है कि जब-जब धर्म और देश पर संकट आया, राजपूत ढाल बनकर खड़े हुए।"

JASWANT RATHORE

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