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तारे ही तारे कहानी | बच्चों के लिए रात के आसमान की सीख देने वाली प्रेरणादायक कहानीतारे ही तारे कहानी
तारे ही तारे कहानी (Tare Hi Tare Kahani)
एक शांत रात थी। आसमान बिलकुल साफ था और उसमें तारे ही तारे चमक रहे थे। गाँव का एक छोटा बच्चा अनय अपने घर की छत पर बैठकर आसमान को निहार रहा था। हर तारा उसे अलग-अलग तरह से चमकता हुआ दिख रहा था।
कुछ तारे ज्यादा चमकीले थे, कुछ कम। कुछ पास लगते थे और कुछ बहुत दूर।
अनय ने अपनी माँ से पूछा—
“माँ, ये तारे अलग-अलग क्यों चमकते हैं?”
माँ मुस्कुराई और बोली—
“बेटा, हर तारे की अपनी रोशनी होती है। जैसे-जैसे वो मेहनत करता है, उतनी ही ज्यादा चमक पैदा करता है। कोई भी तारा बिना कोशिश के चमकदार नहीं बनता।”
अनय ने उत्सुकता से फिर पूछा—
“क्या मैं भी किसी तारे की तरह चमक सकता हूँ?”
माँ ने उसके सिर पर हाथ फेरा और कहा—
“हाँ बेटा, अगर तुम अपने काम, पढ़ाई और सपनों के लिए लगातार मेहनत करोगे, तो तुम भी आकाश के सबसे चमकीले तारे की तरह चमकोगे।”
उस रात अनय ने तारों को एक-एक करके देखना शुरू किया। उसे ऐसा लगा जैसे हर तारा उसे अपनी कहानी सुना रहा हो—
“हार मत मानो… आगे बढ़ते रहो… एक दिन चमक तुम्हारे हिस्से भी आएगी।”
धीरे-धीरे अनय की आँखें बंद होने लगीं।
तारों की चमक जैसे उसे एक मीठे सपने में ले जा रही थी—सपना जहाँ वह अपने लक्ष्य तक पहुँच चुका था और आसमान में एक चमकीला तारा उसकी तरह जगमगा रहा था।
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⭐ कहानी की सीख (Moral of the Story)
हर इंसान की अपनी अलग चमक होती है।
मेहनत और लगन से कोई भी ऊँचाइयाँ छू सकता है।
कभी भी खुद की तुलना दूसरों से न करें।
अपने सपनों में विश्वास रखें, वे जरूर पूरे होते हैं।
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चिड़िया की ज्ञान की बातें | Inspirational Moral Story in Hindi
एक घने जंगल में एक छोटी सी चिड़िया रहती थी। वह दिखने में भले ही छोटी थी, लेकिन उसकी सोच बहुत बड़ी और समझदारी से भरी थी।
जंगल के कई जानवर उसकी बातें सुनते और उससे सीख लेते थे।
एक दिन जंगल में भयानक आग लग गई। सभी जानवर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ने लगे। बड़े-बड़े जानवर जैसे हाथी, शेर और भालू भी डर गए थे।
लेकिन उसी समय देखो, वही छोटी चिड़िया अपनी चोंच में कुछ बूंद पानी लेकर आग पर डाल रही थी।
सभी जानवर हँसने लगे—
“अरे चिड़िया! तेरी चोंच की बूंदों से आग क्या बुझ जाएगी?”
चिड़िया ने शांत होकर कहा:
“शायद नहीं… लेकिन मैं अपनी तरफ से प्रयास ज़रूर कर रही हूँ।
अगर हम सब मिलकर कोशिश करें, तो बड़ी से बड़ी समस्या भी हल हो सकती है।”
उसकी ये बात जंगल के सभी जानवरों के दिल को छू गई।
धीरे-धीरे सब जानवर पानी लाने लगे। मिलकर मेहनत की, और आख़िरकार आग बुझ गई।
जंगल के सभी जानवरों ने मान लिया कि—
“छोटी सी कोशिश भी बड़े बदलाव ला सकती है।”
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⭐ कहानी का नैतिक (Moral of the Story)
छोटी से छोटी कोशिश भी मायने रखती है।
बड़े काम मिलकर करने से ही संभव होते हैं।
हिम्मत और सकारात्मक सोच हमेशा जीत दिलाती है।
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🦁 शेर और चूहे की कहानी | Panchtantra Moral Story
बहुत समय पहले जंगल में एक शक्तिशाली शेर रहता था। एक दिन वह गहरी नींद में था। तभी एक छोटा सा चूहा खेलते-खेलते उसकी पीठ पर चढ़ गया।
शेर की नींद खुली, और उसने चूहे को अपने बड़े पंजों में दबोच लिया।
चूहा डरते-डरते बोला:
“महाराज! मुझे माफ कर दीजिए। शायद मैं भी कभी आपकी मदद कर सकूँ।”
शेर यह सुनकर ज़ोर से हँसा। उसे लगा कि इतना छोटा सा चूहा भला उसकी क्या मदद करेगा?
लेकिन फिर भी उसने दयालुता दिखाते हुए चूहे को छोड़ दिया।
कुछ दिनों बाद वही शेर शिकारी के जाल में फँस गया। वह ज़ोर-ज़ोर से दहाड़ने लगा।
आवाज़ सुनकर चूहा तुरंत वहाँ आया। उसने अपने तेज दाँतों से जाल को काटना शुरू किया।
थोड़ी ही देर में शेर आज़ाद हो गया। उसने चूहे का धन्यवाद किया और समझ गया कि —
कभी भी किसी को छोटा या कमजोर नहीं समझना चाहिए।
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⭐ कहानी का नैतिक (Moral of the Story)
किसी को भी कमज़ोर मत समझो।
हर जीव का अपना महत्व होता है।
नेकी का फल सदैव अच्छा होता है।
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एक समय की बात है, एक राज्य में एक न्यायी और दयालु राजा रहता था। वह अक्सर भेष बदलकर अपने राज्य का हाल देखने जाता था ताकि उसे लोगों की वास्तविक स्थिति का पता चल सके।
एक दिन राजा ने साधारण किसान के कपड़े पहनकर गांव की ओर चलना तय किया। रास्ते में उसे एक किसान खेत में कड़ी मेहनत करते हुए दिखाई दिया। किसान धूप में पसीने से तरबतर होकर खेती कर रहा था, लेकिन उसके चेहरे पर थकान के बजाय संतोष दिख रहा था।
राजा ने उससे पूछा—
“भाई, इतनी मेहनत क्यों करते हो? क्या तुम्हें कभी थकान नहीं होती?”
किसान मुस्कुराकर बोला—
“मैं मेहनत इसलिए करता हूँ कि मेरे परिवार को दो वक्त की रोटी मिल सके। मेहनत करने से संतोष मिलता है और भगवान ने मेहनत का फल कभी व्यर्थ नहीं जाने दिया।”
राजा उसकी ईमानदारी और मेहनत से बहुत प्रभावित हुआ। उसने फिर पूछा—
“तुम्हारे खेत में पानी की कमी तो नहीं होती?”
किसान बोला—
“कभी-कभी होती है, लेकिन मैं शिकायत नहीं करता। राजा हमारा है, वह जरूर किसी दिन इसका समाधान करेगा।”
किसान की यह बात सुनकर राजा का हृदय पिघल गया। राजा ने सोचा—
“यह आदमी कठिनाइयों के बावजूद मेरा इतना विश्वास करता है। मुझे इसके लिए कुछ करना चाहिए।”
अगले ही दिन राजा ने अपने दरबार में आदेश दिया कि उस गांव में एक नई नहर बनाई जाए, ताकि किसानों को सालभर पानी मिल सके। साथ ही, उसने किसान को उसके परिश्रम के लिए सम्मान और उपहार भी दिया।
जब किसान को पता चला कि वही साधारण आदमी वास्तव में राजा था, तो वह भावुक हो गया और बोला—
“महाराज, आपने मेरे गांव की तकदीर बदल दी। इसी विश्वास ने मुझे हमेशा ईमानदारी से काम करने की प्रेरणा दी।”
राजा मुस्कुराया—
“मेहनत और विश्वास रखने वाले लोग ही राज्य की असली ताकत होते हैं।”🌟 कहानी की सीख (Moral of the Story)
मेहनत और ईमानदारी का फल हमेशा मिलता है।
सच्चा नेता वही होता है जो अपनी प्रजा का हाल समझे।
कर्तव्य और विश्वास जीवन को मजबूत बनाते हैं।
बुरे हालात में भी सकारात्मक सोच बहुत काम आती है।
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एक घने जंगल में एक भेड़िया रहता था। एक दिन वह बहुत जल्दी-जल्दी खा रहा था, तभी उसकी हड्डी गले में फंस गई। दर्द और घुटन से परेशान होकर वह इधर-उधर भागने लगा।
जंगल के किनारे उसे एक लंबी गर्दन वाला सारस दिखाई दिया। भेड़िया सारस से बोला,
“कृपया मेरी मदद करो। मेरी गर्दन में हड्डी फंस गई है। अपनी लंबी चोंच से इसे निकाल दो। मैं तुम्हें अच्छा इनाम दूंगा।”
सारस को उस पर दया आ गई। उसने अपने चोंच को भेड़िये के बड़े मुँह में डालकर सावधानी से हड्डी बाहर निकाल दी। भेड़िया तुरंत दर्द से राहत महसूस करने लगा।
सारस ने कहा,
“अब मुझे मेरा इनाम दो।”
भेड़िया हँसते हुए बोला,
“क्या इतना बड़ा भेड़िया भी तुम्हारा सिर अपने मुँह से सुरक्षित वापस निकालने का इनाम नहीं है? चलो भागो यहाँ से!”
सारस समझ गया कि उसने एक स्वार्थी प्राणी पर भरोसा किया था। निराश होकर वह उड़ गया।
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📚 कहानी की सीख (Moral of the Story)
स्वार्थी लोगों से किसी इनाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
नेकी करो और आगे बढ़ जाओ।
समझदारी से मदद करो, लेकिन इनाम की लालच मत रखो।
भेड़िया और सारस की कहानी
Bhediya aur Saras ki Kahani
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बच्चों के लिए नैतिक कहानी
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राक्षस और राजकुमार – पूरी कहानी (Full Story)
बहुत समय पहले अवंतिका राज्य में एक बहादुर राजकुमार आरव रहता था। राज्य में सब कुछ शांत था, लेकिन एक समस्या थी—
पास के जंगल में एक भयानक राक्षस रहता था, जो रात होते ही लोगों को डराता और उनकी चीज़ें लूट लेता।
एक दिन राजकुमार ने निर्णय लिया—
“अब बहुत हुआ, मैं इस राक्षस से खुद बात करूँगा।”
राजा ने मना किया, पर राजकुमार अडिग था।
वह घोड़े पर सवार होकर जंगल पहुँचा।
जैसे ही वह गुफा के पास पहुँचा, राक्षस गरजा,
“कौन है जो मेरी नींद खराब करने आया है?”
राजकुमार साहस से बोला,
“मैं आरव हूँ। अगर तुम लोगों को परेशान करना बंद कर दो, तो मैं तुम्हें भी सम्मान से जीने दूँगा।”
राक्षस चौंका—
“कोई मुझसे बातें करने की हिम्मत नहीं करता… तुम क्यों कर रहे हो?”
राजकुमार बोला,
“क्योंकि हर बुरे के पीछे एक वजह होती है। बताओ तुम इतने गुस्से में क्यों रहते हो?”
राक्षस की आँखें भर आईं,
“मैं पहले एक इंसान था। लोगों ने मुझे धोखा दिया, इसलिए मैं जंगल में अकेला रहने लगा। गुस्सा बस आदत बन गया…”
राजकुमार मुस्कुराया,
“तो आदत बदलो। मैं तुम्हें मौका देता हूँ—राज्य की रक्षा करो, लोगों की मदद करो। तुम मेरे सैनिकों में शामिल हो सकते हो।”
राक्षस ने पहली बार दहाड़ नहीं लगाई—बल्कि सिर झुका दिया।
“अगर तुम मुझ पर भरोसा करते हो, मैं बदलने को तैयार हूँ।”
राजकुमार उसे महल ले गया।
धीरे-धीरे लोग राक्षस को डरने की बजाय सम्मान देने लगे।
अब वही राक्षस, जो कभी खतरा था, राज्य का सबसे भरोसेमंद रक्षक बन गया।
राजा ने घोषणा की—
“सच्चा योद्धा वही है जो तलवार से नहीं, दिल से जीतता है।”
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सीख (Moral of the Story)
हर बुराई के पीछे कोई छिपी कहानी होती है।
दया और समझदारी से बड़ा कोई हथियार नहीं।
इंसान बदल सकता है, अगर उसे मौका दिया जाए।
बिल भिजवा देता है – मजेदार हास्य कहानी
शहर में गोपाल नाम का आदमी था, जो हर जगह जाता था लेकिन कभी खुद पैसे नहीं देता था।
उसकी एक ही ट्रिक—
“मैं तो बाद में बिल भिजवा देता हूँ!”
एक दिन वह अपने दोस्त राकेश के साथ होटल गया।
गोलगप्पे, चाट, दो प्लेट छोले-भटूरे… सब खत्म होने के बाद वेटर आया।
राकेश बोला,
“गोपाला, आज तू पैसे देगा!”
गोपाला हँसकर बोला,
“अरे पैसे क्यों दूँ? मैं बिल भिजवा देता हूँ।”
राकेश ने माथा पकड़ लिया,
“किसको भिजवाएगा? घरवालों को?”
गोपाला बोला,
“नहीं रे… खाने की दुकान वाले को!”
वेटर हैरान,
“बाबूजी, हम ही तो होटल वाले हैं! बिल हमें ही देना है!”
गोपाला अकड़कर बोला,
“तो भिजवा दूँगा ना! तुम एक बार बिल भेजकर देखो… मैं भी भेज दूँगा वापस!”
वेटर गुस्से में बोला,
“क्या मतलब?”
गोपाला बोला,
“सीधी बात है—तुम बिल भेजोगे, मैं व्हाट्सऐप पर ‘Seen’ करके छोड़ दूँगा!”
यह सुनते ही पूरा होटल हँसी से गूंज उठा।
वेटर ने कहा,
“बाबूजी, ये होटल है, व्हाट्सऐप ग्रुप नहीं!”
आखिर में राकेश ने मजबूरी में पैसे दिए और जाते-जाते कहा—
“गोपाला, तू बहुत बड़ा कलाकार है।”
गोपाल मुस्कुराया—
“कलाकार नहीं भाई… बिल-कारक हूँ! जो भी बिल आता है, वापस भिजवा देता हूँ!”
एक दिन सुबह-सुबह मोहन की पत्नी सविता ने बड़ी मासूमियत से पूछा—
“सुनते हो, अगर मेरी एक ख्वाहिश पूरी कर दो तो मैं उम्र भर खुश रहूँगी!”
मोहन थोड़े डर गए, सोचने लगे—
कहीं फिर से कोई महंगा फोन या विदेश यात्रा की बात न कर दे…
मोहन ने हिम्मत जुटाकर पूछा,
“ठीक है, बोलो क्या ख्वाहिश है?”
सविता बोली,
“मेरी बस एक छोटी-सी इच्छा है… मुझे ऐसा पति चाहिए जो मुझे रोज़-रोज़ गाड़ी से घूमाए, फूल लाकर दे, और मेरी हर बात माने।”
मोहन मुस्कुराया और बोला,
“तो फिर मुझे भी एक छोटी-सी ख्वाहिश पूरी करनी होगी…”
सविता बोली, “वो क्या?”
मोहन बोला,
“बस तुम बता दो कि ये सब करने वाला पति पड़ोस वाली कल्पना दीदी कहाँ से लाती हैं, मैं भी वहीं से ले आता हूँ!”
सविता गुस्से में बोली:
“अच्छा! आज मेरी ख्वाहिश तो रह गई, पर तुम्हारी आज ‘ख्वाइश’ पूरी कर दूँ? खाना बनाते हुए बेलन भी चलाऊँ क्या?”
मोहन तुरंत बोले—
“नहीं-नहीं, रहने दो। मैं ही रोज़ गाड़ी भी चलाऊँगा, फूल भी लाऊँगा… बस बेलन नीचे रख दो!”
और इस तरह मोहन ने सीख ली—
पत्नी की ख्वाहिश पूरी करो, वरना उसकी ‘ख्वाइश’ नहीं… उसकी ‘क्वाइशें’ पूरी कर देंगी!
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सीख (Moral)
पत्नी की ख्वाहिशें नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है।
हर मज़ाक सोच-समझकर करना चाहिए।
खुशहाल जीवन के लिए थोड़ा समझौता ज़रूरी है।
मजेदार हास्य कहानी
एक छोटे से कस्बे में रमेश नाम का आदमी रहता था। वह हमेशा दूसरों की तारीफ़ करने में पीछे नहीं हटता था। उसकी आदत थी कि वह किसी की भी, कभी भी, कहीं भी तारीफ़ कर देता—चाहे जिस बात की ज़रूरत हो या नहीं।
एक दिन रमेश की मुलाकात उसके पड़ोसी शyamlal से हुई। शyamlal ने नए कपड़े सिलवाए थे, पर सिलाई कुछ अजीब थी—कॉलर टेढ़ा, बटन उल्टा और फिटिंग ढीली।
रमेश ने अपनी आदत के अनुसार तुरंत बोल दिया,
“वाह शyamlal जी! क्या शर्ट है! बिल्कुल फिल्मी हीरो लग रहे हो!”
शyamlal फूलकर कुप्पा हो गया।
वह उसी उत्साह में दर्जी के पास पहुँचा और बोला,
“देखो, मेरी शर्ट पर सब मेरी तारीफ़ कर रहे हैं!”
दर्जी ने देखा और हँसकर बोला,
“ये शर्ट तो खराब सिल गई है, तारीफ़ किसने की?”
शyamlal ने गर्व से कहा, “रमेश ने!”
दर्जी भड़क गया, “तो इसका मतलब मैंने गलत सिलाई की और रमेश ने मज़ाक उड़ाया! मैं जरूरत तुम्हें नई शर्ट मुफ़्त में दूँगा!”
लेकिन साथ ही उसने कहा, “पहले रमेश को लेकर आओ, मुझे भी सुनना है उसने क्या तारीफ़ की थी!”
अब शyamlal ने रमेश को पकड़ लिया।
“चलो मेरे साथ! तुम्हारी ही वजह से मैं फँस गया हूँ।”
दर्जी ने रमेश से पूछा,
“तुमने मेरी सिलाई की तारीफ़ क्यों की?”
रमेश डर गया और बोला,
“मैं तो बस आदत से मजबूर हूँ… मैं तो हर चीज़ की तारीफ़ कर देता हूँ!”
दर्जी ने गुस्से में कहा,
“तो भाई, ज़रूरत से ज्यादा तारीफ़ करोगे तो नुकसान तो होगा ही!”
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई—घर लौटकर शyamlal ने रमेश को कहा,
“आज से मेरी किसी चीज़ की तारीफ़ मत करना! नहीं तो इस बार शर्ट नहीं, मेरी बीवी मुझे कसेगी!”
अब रमेश सीख गया—तारीफ़ भी सोच-समझकर करनी चाहिए, नहीं तो वाकई… ‘तारीफ़ भी पड़ जाती है महंगी!’
एक घने जंगल में एक शेर रहता था जो अपनी ताकत के घमंड में किसी को भी तंग कर देता था। सभी जानवर उससे डरते थे, लेकिन एक बंदर था जो बहुत चतुर और फुर्तीला था।
एक दिन शेर गुस्से में गरजा,
“जंगल में मेरी ही चलती है! जो भी मुझे चुनौती देगा, मैं उसे सबक सिखा दूँगा!”
बंदर ने हँसते हुए कहा,
“शेर भैया, ताकत तो आपके पास है, लेकिन दिमाग भी कोई चीज़ होती है।”
शेर यह सुनकर नाराज़ हो गया और बोला,
“अगर हिम्मत है तो मेरी ताकत से बचकर दिखाओ!”
बंदर तुरंत एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया और शेर उसे पकड़ न पाया।
फिर बंदर ने कहा,
“शेर भाई, आप अपनी ताकत पर भरोसा करते हैं, लेकिन दिमाग से ही मुश्किलों से निकला जाता है।”
शेर बार-बार पेड़ पर चढ़ने की कोशिश करता रहा, लेकिन असफल रहा। अंत में वह थककर नीचे बैठ गया।
बंदर नीचे उतरा और बोला,
“गुस्सा और घमंड किसी का भला नहीं करते। जो दूसरों को तंग करेगा, उसे ही मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।”
शेर को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने बाकी जानवरों से अच्छा बर्ताव करने का वादा किया।
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Q1: क्या पुरानी गर्लफ्रेंड से मिलना अच्छा है?
A1: हाँ, अगर आप मानसिक रूप से तैयार हैं और सीमाएँ तय कर सकते हैं।
Q2: अचानक मिलने पर कैसे व्यवहार करें?
A2: शांत रहें, स्नेहपूर्ण लेकिन संयमित रहें।
Q3: क्या दोस्ती की उम्मीद करनी चाहिए?
A3: सिर्फ तभी अगर दोनों इसके लिए तैयार हों।
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